वो है

मैं आग हूँ और आब वो है
बरसात मैं शादाब वो है
वो बस सी जाती है ज़ेहन मैं कभी
मैं नींद हु ओर ख्वाब वो है

लहर हो जैसे नीदिया की मैं हवा से उसमें चलता हूं
वो किनारो से गर बिछाडती है मैं रेत से उसमे मिलता हूँ

मैं आसमान हु परवाज़ वो है
मैं गर नज़्म सा तो साज़ वो है
वो ग़ज़ल से मुझको पढ़ती है
मैं लफ्ज़ हु आवाज़ वो है

मुख़्तसर सी बात पर मैं खिंचा खिंचा से जाता हूं
वो रात है कोई सर्दी की मैं उसे बिता बिता से जाता हूं

नदी सा मैं ओर साहिल वो है
मैं हल हु उसका मुश्किल वो है
मैं रास्ता हु अगर वो राह है
मैं मसफ़त ओर मंज़िल वो है

वो नमाज़ है मेरी सुबह की मैं अदा से उसको करता हु
वो आयात मेरी नवाज़िश की मैं श्लोक से उसको पढता हु

मैं सवाल हु और इजाज़त वो है
मैं इश्क़ हु ओर चाहत वो है
वो अज़ान सी सूफी है
मैं जो झुकूं तो इबादत वो है

वो उर्दू मेरी काफिये सी मैं शेर से उसको लिखता हूं
वो कोरे कागज़ सी गर पाक है मैं स्याही से उसमे दिखता हु

मैं इख्लास हु तो हयात वो है
मैं बात हु जस्बात वो है
चाह है कोई गर खुदा की
ज़रिया मैं मियाद वो है

वो दराखत सी रहती है वही मैं परिंदे से उसे तलाशता हु
वो किस्से से मुझको कहती है उसके लम्हो की दास्तान हु

ईमान मैं हु तो फ़र्ज़ वो है
मैं आज़ाद से ओर कर्ज़ वो है
घुल सी जाती है शराबों सी
मैं जीस्त हु ओर तर्ज़ वो है

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Bewajah 

Aye khuda kabi to nazre mila bewajah 

Meri kahani zamane ko bata bewajah 
Ishq tha jung thi sb zahaz bhi to tha 

Fir di kyu ye saza bewajah 

Aye khuda kabi to nazre mila bewajah 

Jbse khoya use kisi manzil ki khwaish nahi 

Fir kyu dhundhta hu uske nishan bewajah 

Aye khuda kabi to nazre mila bewajah 

Usse baton ka koi bahana bhi to nahi 

Khojta kyu hai koi wajah khamakha bewajah 

Aye khuda kabi to nazre mila bewajah 

Uske diye zakhmo pr hasna ab to adat hai meri 

Aa kar kabhi to rula bewajah 

Aye khuda kabi to nazre mila bewajah 

Tu nahi to ab ibadat bhi nahi 

Kyu aya namazo main zikr tera bewajah 

Aye khuda kabi to nazre mila bewajah 

Jis tarah gaya vo jhute fasane de kar 

Us tarah kabhi na jane ke liye aa bewajah

Aye khuda kabi to nazre mila bewajah 
Vo nahi chahat se koi wasta bhi nahi

Fir kyu chahta hu use bepanah bewajah

Aye khuda kabi to nazre mila bewajah 
Lamhe usne jo diye the wahi dastan thi meri

Kyu fohrata hai fir wahi falsafa bewajah 

Aye khuda kabi to nazre mila bewajah 
Khudse pyar nahi usse nafrat ki wajah bhi nahi

Fir kyu rhta hai khafa khafa bewajah 

Aye khuda kabi to nazre mila bewajah